Poem On Nature In Hindi : प्रकृति पे कुछ बेहतरीन कविताये

Poem On Nature In Hindi : दोस्तो जैसा की हम सब जानते है दुनिया में प्रकृति के बिना कुछ भी नही है, अगर आज हम ज़िंदा है तो केवल प्रकृति की वजह से है इसीलिए आज मैं आपके लिए ( Poem On Nature In Hindi ) लेख लेके आया हु.

ऐसे में हमे प्रकृति की रक्षा करनी चाहिए, ओर उसपे कविताये लिख कर दूसरे लोगो को भी इसके प्रति जागरूक करना चाहिए.

ओर अगर आप एक कवि है तो अपनी प्रकृति को देख कर आपको कविताये लिखने का मन करता होगा इसीलिए आज हम आपके लिये ( Poem On Nature In Hindi ) प्रकृति के ऊपर कुछ बेहतरीन कविताये लेके आये है आशा करता हु आपको जरूर पंसद आएगी.

Poem On Nature In Hindi

1. प्रकृति की क्या शान है, कैसे वन उपवन लहराते हैं।

प्रकृति के रंगों को देखकर हम तो अचम्भित हो जाते हैं।

प्रकृति ने हमको सब कुछ दिया है,

लेकिन प्रकृति को हमने क्या दिया है?

प्रकृति ने हमको फल दिए, फूल दिए, वन दिए,

उपवन दिए, समुद्र दिए, झरने दिए, द्विप दिए,

समतल दिए, प्रकृति ने हमे कई रंग दिए,

रहने को घर दिए, अपनी शीतल छाया दी,

मनुष्य को माया दी। आओ आज ये कसम खाते हैं,

प्रकृति को मिलकर बचाते हैं।

प्रकृति की क्या शान है कैसे वन उपवन लहराते हैं।

2. प्रकृति के रंगों को देख कर आँखों को जो ठंडक मिलती है,

ऐसा लगता है जैसे ये प्रकृति हमसे कुछ कहती है।

प्रकृति के अनेक रूप हैं कभी रात है काली कभी उज्ज्वल सवेरा है।

कभी लगता है पर्वत कहता है मेरी तरह ऊँचे बन जाओ,

कभी आसमान कहता है इतने बिखरो ये सारा संसार ढक जाए।

जब इस धरती पर जाता हूँ प्रकृति के बीच जाके खो जाता हूँ,

लगता है ये झरना कुछ मुझसे कहता है।

कुछ कहती है कोयल की वो मधुर आवाज़।

प्रकृति से हमे सब मिला, भूखो को इससे अन मिला,

कपड़ो को भी ये सवारती, लेकिन कभी थककर न हारती।

3. ऐ इंसान तूने ये क्या किया, क्यों तूने प्रकृति को प्रदूषित किया।

प्रकृति ने तुझे सब कुछ दिया लेकिन तूने इसे दूषित किया।

पेड़ काट के तूने प्रकृति को क्यों बर्बाद किया है।

ऐ इंसान तूने प्रकृति को क्यों इतना दूषित किया है।

तुझे तो प्रकृति ने स्वच्छ जल दिया है।

फिर क्यों ऐ इंसान तूने इसे दूषित किया है।

तुझे तो प्रकृति ने स्वच्छ वायु दी है।

फिर क्यों ये इंसान तूने इसे दूषित कि है।

इंसान तू इसका उपयोग कर इसे एतराज़ नही है।

तू इसको बर्बाद कर तो ये इसे मंजूर नही है।

जब प्रकृति को बर्बाद तू करता है तब ये चेतावनी देती है।

जब इसकी चेतावनी को नजरअंदाज किया जाता है,

तो ये बड़ी प्रलय लाती है। ऐ इंसान तूने ये क्या किया,

क्यों तूने प्रकृति को दूषित किया,

प्रकृति ने तुझे सब कुछ दिया लेकिन तूने इसे दूषित किया.

4. चाहे बहे हवा मतवाली

चाहे बहे हवा लू वाली

फूल हमेशा मुस्काता

पत्तों की गोदी में रहकर

फूल हमेशा मुस्काता

कांटो की नोकों को सहकर

फूल हमेशा मुस्काता

ऊपर रह डाली पर खिलकर

फूल हमेशा मुस्काता

नीचे टपक धूल में मिल कर

फूल हमेशा मुस्काता

रोना नहीं फूल को आता

फूल हमेशा मुस्काता

इसलिए वह सबको भाता

फूल हमेशा मुस्काता

5. जब तपता है सारा अंबर

आग बरसती है धरती पर|

फैलाकर पत्तों का छाता

सब को सदा बचाते पेड़|

पंछी यहां बसेरा पाते

गीत सुना कर मन बहलाते|

वर्षा, आंधी, पानी में भी

सबका घर बन जाते पेड़|

इनके दम पर वर्षा होती

हरियाली है सपने बोती|

धरती के तन मन की शोभा

बनकर के इठलाते  पेड़|

जितने इन पर फल लग जाते

ये उतना नीचे झुक जाते|

औरों को सुख दे कर के भी

तनिक नहीं इतराते पेड़|

हमें बहुत ही भाते पेड़

काम सभी के आते पेड़

6. अगर पेड़ भी चलते होते

कितने मजे हमारे होते

जहां कहीं भी धूप सताती

उसके नीचे बैठ सुस्ताते

बांध तने में उसके रस्सी

चाहे जहां कहीं ले जाते

लगती जब भी भूख अचानक

तोड़ मधुर फल उसके खाते

आती कीचड़ बाढ़ कहीं तो

झट उसके ऊपर चढ़ जाते

जब कभी वर्षा हो जाती

उसके नीचे हम छिप जाते

अगर पेड़ भी चलते होते

कितने मजे हमारे होते

तो दोस्तो ये कुछ पोएम ( Poem On Nature In hindi ) थी जिनको आप याद करके सुना सकते है, अपने दोस्तो के साथ शेयर कर सकते है।

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